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Monday, June 18, 2007

Aaansoooo......

छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालोंकुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है सपना क्या है, नयन सेज परसोया हुआ आँख का पानीऔर टूटना है उसका ज्योंजागे कच्ची नींद जवानीगीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालोंकुछ पानी के बह जाने से, सावन नहीं मरा करता है माला बिखर गयी तो क्या हैखुद ही हल हो गयी समस्याआँसू गर नीलाम हुए तोसमझो पूरी हुई तपस्यारूठे दिवस मनाने वालों, फटी कमीज़ सिलाने वालोंकुछ दीपों के बुझ जाने से, आँगन नहीं मरा करता है खोता कुछ भी नहीं यहाँ परकेवल जिल्द बदलती पोथीजैसे रात उतार चाँदनीपहने सुबह धूप की धोतीवस्त्र बदलकर आने वालों, चाल बदलकर जाने वालोंचँद खिलौनों के खोने से, बचपन नहीं मरा करता है लाखों बार गगरियाँ फ़ूटी,शिकन न आयी पर पनघट परलाखों बार किश्तियाँ डूबीं,चहल पहल वो ही है तट परतम की उमर बढ़ाने वालों, लौ की आयु घटाने वालों,लाख करे पतझड़ कोशिश पर, उपवन नहीं मरा करता है। लूट लिया माली ने उपवन,लुटी ना लेकिन गंध फ़ूल कीतूफ़ानों ने तक छेड़ा पर,खिड़की बंद ना हुई धूल कीनफ़रत गले लगाने वालों, सब पर धूल उड़ाने वालोंकुछ मुखड़ों के की नाराज़ी से, दर्पण नहीं मरा करता है। KKaushikk

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